सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
RSS

तलाश___|||

वह बेज़ान पड़ी घूर रही है
घर की दीवारों को
कभी छत को कभी उस छत से
लटक रहे पंखे को
उसकी नजरें तलाश रहीं है आज 
उन नजरों में परवाह जरा सी
अपने लिए
जिनकी परवाह को वह
खुदको बिसार गई
वो ढूंढ रही है उनकी बातों में
ज़िक्र जरा सी अपने लिए
जिनकी फ़िक्र कर वह
दिन रात मरती रही,
अंतः
कुछ न मिला कहीं उसे
घूँट आंसुओं की पीती रही
खाली हाथों की लकीरों को देख
बस यूँही मुस्कुराती रही
दीवारों से करके बातें दिल की
बोझ दिल का कम करती रही__|||#बसयूँही


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

इक सफर___|||

मासूम सा प्रेम मेरा 
परिपक्य हो गया 
वक़्त के थपेड़ो से 
सख्त हो गया
 किया न गया तुमसे
कदर इस दिल की
आंखे देखों मेरी 
सुखकर बंजर हो गया
कहा न गया तुमसे

लफ्ज़ दो प्यार भरे 
दर्द देखो मेरा पिघलकर
समंदर हो गया
तुम्हे सोच खुश 
होता है दिल 
वर्षों का प्यार जिसका 
रेत हो गया
एक नाम था जो
तुमसे जुड़ा 
देखो जीवन से तुम्हारे 

वह आज मिट चला___|||



  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

छोड़ चली हूँ___|||

मैं छोड़ चली हूँ अब तुम्हें
हृदय में तुम्हारी याद लिए
अनुराग के मधुर क्षणों संग
वियोग की पीड़ा अथाह लिए
कप्पन लिए पैरों में अपने
अवशेष प्रेम का कांधे लिए
जा रही हूँ बहुत दूर तुमसे
बोझ कलंक का माथे लिए
व्यथित मन की घुटती साँसे
आंसुओं से भींगे अधर लिए
मैं छोड़ चली हूँ अब तुम्हें
ह्रदय में तुम्हारी याद लिए__|||


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

#बसयूँही

सदियों से वो
लिखती आई प्रेम
आंधी में तूफान में
बाढ़ में सैलाब में
लेकिन कभी
देख न पाई
वक़्त के थपेड़ों ने
उस स्याही को
कर दिया था फीका


वो फ़रेब खाती रही और मुस्काती रही वह थी प्रेम में वो बस यूँही उसे चाहती रही
पल बिता दिन बीतें
बिता महीनों साल वर्षों से अनदेखी का दिल को रहा मलाल
पत्थर बना दिल उसका
उसी को समझाए यही होता है अंजाम प्यार का, पगली तू क्यूँ नीर बहाये
कौन समझाए
इस पत्थर दिल को वेग उन तेज लहरों का चीर देता है सीना जो इन ऊँचे ऊँचे चट्टानों का
दर्द था, तकलीफ़ थी
ज़ख्म भी कुछ गहरा था संग जिसके उसको उम्र भर बस यूँही तन्हा गुजारना था
अनदेखी भी होनी थी इल्ज़ाम भी सहना था तिरस्कार की अग्नि में जलकर प्यार भी उसी से करना था___|||


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

युद्ध


छिड़ चूका है युद्ध भयानक
और मैं अबकी इंतजार में हूँ
अपनी आत्मा के हार जाने का
अपनी इस घुटी हुई परिस्थितियों से
उबरने के लिए______
मैंने किया है
इक युद्ध का आह्वान
अपने ही दिल और
आत्मा के मध्य
वो दिल जो जलता है
तड़पता है सक्षम होते हुए भी
हर रोज तिल तिल कर मरता है
कारण है एक शत्रु उस का
एक ही शरीर में जो रहता है
कहते हैं जिसे ईश्वर की अमानत
आत्मा कहलाता है
रोक देता है दुःख देने से जो
दर्द पीना सिखाता है
सह अपमान खोकर मान
पात्र हँसी का बना देता है
प्रेम की मरीचिका के पीछे
भागते भागते ,नर्क
जीवन को बना देता है
ये आत्मा ही है सबब इस दिल
के दर्द का, हर बार ही देकर
दलील कोई अपनों को बचा
ले जाता है ,इसे दिखता नही क्या
कष्ट मेरा यह क्यूँ बार बार व्यवहार
मुझसे सौतेलों सा करता है____??


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

कोई कैसे__??

कोई किसी को
करके बर्बाद
कैसे हँस पाता है__?
कोई किसी को
देकर आंसू
कैसे सो पाता है__?
ले सहारा झूठ का
कोई कैसे जीत
जाता है__?
देकर धोखा
कोई किसी को
कैसे भूल जाता है__?
तोड़ हृदय
किसी का कोई
कैसे चैन पाता है__?
कोई सिखला दो
ये गुण हमे भी
रौंद खुशियाँ
किसी की कोई
कैसे जी पाता है__|||?


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

प्रतिबद्धता #पाश

हम झूठ मूठ का कुछ भी नहीं चाहते 
जिस तरह हमारी माँसपेशियों में मछलियाँ हैं
जिस तरह बैलों की पीठ पर उभरे
चाबुकों के निशान हैं जिस तरह कर्ज़ के कागज़ों में
हमारा सहमा और सिकुड़ा हुआ भविष्य है
हम ज़िंदगी, बराबरी या कुछ भी और
इसी तरह सचमुच का चाहते हैं
जिस तरह सूरज हवा और बादल
घरों और खेतों में हमारे अंग-संग रहते हैं
हम उसी तरह हुकूमतों, विश्वासों और खुशियों को
अपने साथ साथ देखना चाहते हैं
ताकतवरों, हम सब कुछ सचमुच का देखना चाहते हैं
हम उस तरह का कुछ भी नहीं चाहते
जैसे पटवारी का ‘ईमान’ होता है
या जैसे किसी आढ़ती की कसम होती है-
हम चाहते हैं अपनी हथेली पर कोई इस तरह का सच
जैसे गुड़ की पत्त में ‘कण’ होता है
जैसे हुक्के में निकोटिन होती है
जैसे मिलन के समय महबूब के होंठों पर
मलाई-जैसी कोई चीज़ होती है
हम नहीं चाहते
पुलिस की लाठियों पर टंगी किताबों को पढ़ना
हम नहीं चाहते
फौजी बूटों की टाप पर हुनर का गीत गाना
हम तो वृक्षों पर खनकते संगीत को
अरमान-भरे पोरों से छूकर देखना चाहते हैं
आंसू गैस के धुएं में नमक चाटना
या अपनी ही जीभ पर अपने ही लहू का स्वाद चखना
किसी के लिये भी मनोरंजन नहीं हो सकता
लेकिन हम झूठ मूठ का कुछ भी नहीं चाहते
और हम सब कुछ सचमुच का देखना चाहते हैं
ज़िंदगी, समाजवाद या कुछ भी और...
#पाश

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

क्यूँ____

क्यूँ आंखे वो मुझे लुभाती
क्यूँ मंत्र मुद्ध मैं हो जाती हूँ
भ्रम संदेहों को
निकाल हृदय से
क्यूँ भाव समर्पण से
भर जाती हूँ
भटकता मन निर्जन वन में
क्यूँ आँसू छलकाता है
क्यूँ याद कर उसे ये दिल
कभी रोता है मुस्काता है
क्यूँ हूक सी उठती है दिल में
क्यूँ आस का पंछी रोता है
जो नही मेरा देख उसे दिल
क्यूँ रह रह आहें भरता है
वो खुश है दुनियां में अपनी
दिल बैचेन मेरा क्यूँ रहता है
क्यूँ देखने को सूरत उसकी
आँखों का काजल पिघलता है
क्यूँ खेलता है दिल से कोई
क्यूँ पत्थर दिल कोई होता है
सोचता है अक़्सर मन ये मेरा
क्यूँ लेकर खुशियां प्रेम
दर्द हमे दे जाता है__|||

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

मुँह चिढ़ाती तस्वीर__|||

कुछ ही पल तो हुए थे
वह अपनी तस्वीर जो
तुमने मुझे दी थी मुँह
चिढ़ाती हुई, अचानक
उस तस्वीर को देख मैं
अपनी हँसी रोक न पाई
यकीं सा हो चला था
तुम्हारे दिल में अपने होने का
तुम्हारे कहे हर शब्द का
नये साल में तुम्हारे बदलाव का
तुम्हारे प्यार की सच्चाई का
फिर कभी न छोड़ जाने के
वादे का ,तुम्हारे जीवन में
मेरी ज़रूरत का,एक तस्वीर
इक पल और ढ़ेरों ख़ुशफैमीयों
संग मैं बहुत खुश हो
हँस रही थी ,
लेकिन यह क्या
अभी तो मैं जी भर
हँसी भी न थी के तस्वीर ने
अपना भाव बदल लिया
होंठो की हँसी मेरी आँखों में
बन आँसू बहने लगा, अब 
रोज सुबह मुँह चिढ़ाती
तुम्हारी तस्वीर तुममें
मुझे मेरे वज़ूद का
अहसास करा जाती है
और मैं बहा चंद आँसू के कतरे
खुदको व्यस्त कर दर्द से बचने
की अथाह कोशिशों में लग जाती हूँ__|||#बसयूँही :)



  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

#बसयूँही

भ्रम में भ्रमित
भ्रमण करता रहा
यह दिल बसयूँही
भटकता रहा__


फिर वही खेल फिर वही तमाशा
बेइंतहां मुहब्बत और दर्द बेतहाशा__


निशा रात्रि के माथे पर

आँखे हैं दो धँसी हुई

अश्क़ों की लकीरें बनती है


दिल भारी भारी लगता है__


दर्द है मेरे सीने में आँखों में आसूँ है कहाँ छुपाऊँ ख़ुदको मैं के हर तरफ़ तू ही तू है__

आशंकाओं के साये में दिल कर रहा विलाप है अश्रुओं की धार बह चली व्याकुल ये मन संसार है__

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

शब्दों के तुम कारीगर__|||


जो हो भूल कोई मुझसे प्रिये
तुम उन्हें अनदेखा किया करो
न मुँह मोड़ो यूँ छोड़ मुझे तुम
मेरे प्रेम को महसूस किया करो

हो शब्दों के तुम कारीग़र
मज़दूरी नित् किया करो
हूँ मैं ग़र कविता तेरी
तुम मेरा विस्तार करो~

तोड़ो मरोड़ो शब्दों को
जज़्बातों से मुझे जलाओ
अहसासों का मरहम लगा
एक रूप नया तुम दे जाओ~

प्यार से तराशो मुझे तुम
कभी लबों से गुनगुनाओ
महक उठे हर लफ़्ज़ मेरे
मुझे इत्र इश्क़ का लगा जाओ~

छंदों से मेरा श्रृंगार करो
अंलकार से मुझे सजाओ
गीत बना इश्क का मुझे 
होंठो से अपने मुझे लगाओ~

मैं बनके रचना तेरी
मन ही मन इठलाऊँ
कुछ ऐसा गढ़ रचनाकार मुझे
की मैं लबों पर तेरे छा मुस्काऊँ~|||


  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

स्नेह लिखो दुलार लिखो

तुम थे तुम हो तुम ही रहोगे
नफरत लिखो या प्यार लिखो
कहता है हमदम ये साल नया
तुम स्नेह लिखो दुलार लिखो
करते हो तुम सवाल बहुत
कभी तो अपना हाल लिखो
आती हूँ मैं याद तुम्हें भी
कुछ ऐसा इस साल लिखो
छोड़ो अब ये व्यथापुराण
आंसुओं का विवरण रहने दो
विपुलहर्ष ले नववर्ष आया
तुम हर धड़कन को प्रेम लिखो__|||💞

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

एक सिक्का___|||

विदा लेते वर्ष ने
एक सिक्का रखा है
मेरी हथेली पे
उम्मीदों का
मैं बहुत खुश हूँ
पर डर ने मुझे
अपने घेरे में
कैद रक्खा है
ख़ौफ़ की जंजीरों से
बांध रखा है
मैं चाहती हूँ हँसना
अपनी खुशी
सबके संग बाँटना
पर बीते वक़्त के
निष्ठुर हवा के
थपेड़ों ने मुझे
तोड़ रक्खा है
अंदेशा के घने
बादलों ने मुझे
घेर रक्खा है
चुपचाप ख़ामोश
मैं भींच हथेली
ये सिक्के वाली
सीने से लगा
सबकी नज़रों से
बचा...नववर्ष में
प्रवेश करना चाहती हूँ
ताकि दे सकूँ फिर इक
प्रलोभन नया
आने वाले समय में
अपने दिल को
तुम्हारे साथ का
अपने विस्वास का
हमारे प्रेम के
इस मधुर अहसास का___|||#बसयूँही

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

तुम संग___|||

तुम्हारा स्पर्श
और वो सुक़ून
भरा अहसास
मैं आज भी
महसूस करती हूँ
मूंद आँखों को मैं
आज भी तुम्हें जीती
हूँ
मेरे उदास लम्हों में
मेरी तन्हाई के पलों में
होते हो तुम मेरे
बेहद करीब
मुस्कुराते हुए
बाँहों में अपनी मुझे
समाये हुए

मैं नही चाहती
पलकेँ उठाना
मैं नही चाहती
ख़्यालों से जगना
मैं चाहती हूँ तुम्हें
जी भर देखना
मैं चाहती हूँ तुमसंग
बस यूँही जीना

ये जो आँसू हैं
मेरी आँखों में
तेरी चाहत की
निशानी है
ये जो आह
तड़प है
मेरे सीने में
हमारे प्यार की
कहानी है

इक जनम तो होगा ऐसा
जो तू मेरे करीब होगा
होगी फ़िक्र मेरी भी तुझे
जब तू मेरा नसीब होगा__|||🌷

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

अतीत का हिस्सा__|||

पथराई आँखों से
निहारती है वो
मुस्कुराती हुई
तस्वीरें अपनी
जो आज अतीत का
हिस्सा बन
समेट अपने
इतिहास को
जमा होकर
रह गईं हैं
मोबाइल के
फोल्डरों  में
वह अकसर
मोबाइल के
स्क्रीन पर तो
कभी किसी
डीपी में लगा
अपनी तस्वीर
उन लम्हों को
करके याद
चाहती है
कुछ पल को
बिलकुल वैसे ही
मुस्कुराना
लेकिन उसके
भावहीन होटों पर
हो हरकत कोई
इससे पहले ही
फूट पडती है
आँखों के कोरों से
इक धारा
अश्रुओं की
बिना उसके
अनुमति के
बस यूँही____|||#बसयुंही



  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS