सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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हाथो में हाथ नहीं तो क्या 
 जन्मो का तो साथ है 
दूर करदे आपकी यादो से 
किसकी इतनी ओकात है :)

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