सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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हर गम से राहत मिल जाये 
 जो तेरा दीदार हो जाये 
हर घरी तेरी याद में जिए जाते है 
तेरे कहे हर लफ्जो को बार बार 
धोराते है ...
जिंदिगी गुजर रही है 
हम सब्र किये जाते है 
कैसे यकीन दिलाये के 
तेरे याद में ही जीए जाते है ...

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