सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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दिन भर  बस उनकी बाते 
प्यार भरी उनकी सोगाते 
लो फिर आ गयी रात 
ले कर चाँद को साथ 
वाहा  भी हम झलक 
बस उनके ही पाते :)  
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