सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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दिल से

परिस्थिति है कुछ इस तरह 
ज़िन्दगी हो केद जिस तरह 
न रिहा हो सकू 
न केद रह सकू 
न जाने ये ज़िंदगी अब 
कटेगी किस तरह   

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