सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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जिंदिगी तेरी अज़ब कहानी
चहल पहल सब ऊपर से  
अन्दर से है लगती वीरानी
कितनी भी कोशिस करू 
 दिखती रहू खुशिओ की रानी 
न जाने क्यों कभी कभी ये सब लगती बेगानी 
समझ नहीं पाती  खुद को या 
ये दुनिया ही है मेरे लिए अनजानी 

                                            (निभा चौधरी)

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