सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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 अब की बार सोचा है खामोशी को बना लेंगे अंदाज ए बया
ना लफ़्ज़ ढूंढ़ने परेंगे ना ही किसी को नागवार गुजरेगा !!!!!!

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