सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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बिन तेरे.......

बिन हवा खुशबू क्या.......तुम बिन मेरी जिंदगी क्या
ये सूरज चाँद सितारें क्या..तूँ जो नही तो रौशनी क्या
ये हँसीं  ......मुश्कान .............ये मुस्कुराहट क्या
बिन तेरे इस जहां में कोई ख़ुशी क्या..................
ये पुजा वो अरदास कोई इबादत क्या.................
जो तेरी लिये नही वो मेरी भक्ति क्या..................

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2 comments:

Vivek Khanna said...

बहुत सुंदर ..... :)
जो तेरे लिए नहीं .... वो भक्ति क्या ..!!!

निभा चौधरी said...

शुक्रिया आपका :)

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