सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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आजा रे आजा अब तूं आजा....!!!!

जागूं मैं रात रात 
बीतें न रतियाँ 
सामने आजा ज़ालिम 

कर ले चंद बतियाँ 
रश्मे मोहब्बत..अब तूं निभा जा 
लग जा गले मेरे...सामने तूं आजा 
तड़पे हैं ये दिल........बैचेन हैं साँसें
सुन ले मोसे तूं.........दिल की बातें 
प्रेम का ज्योत सनम.....आके जला जा 
इक बार मेरा कहा अब के तुन मान जा 
कैसा बेदर्दी है रे............कैसा सौदाई
इक पल में किया तूने मुझको पराई
दर्द का दवा मुझे.......आके तूं दे जा 
सिने से आके मुझे अपनी लगा जा 
इक बार आजा जाना इक बार आजा 
मेरी उदासियों को...........अब दूर करदे 
गले से लगाके मोहे अंखियों को चूम ले 
मन की सदाएँ मेरी....इक बारी सुन ले 
मुड़के मुझे तूं ...........इक बारी देख ले 
प्रेम में तेरे निशदिन बीतें ना इक पल तुमबिन 
आके झलक अपनी अब तूं दिखा जा 
आजा रे साजन अब तूं आजा 
आजा रे आजा अब तूं आजा 

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8 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (06-09-2014) को "एक दिन शिक्षक होने का अहसास" (चर्चा मंच 1728) पर भी होगी।
--
सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को नमन करते हुए,
चर्चा मंच के सभी पाठकों को शिक्षक दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत सुन्दर !
गुरु कैसा हो !
गणपति वन्दना (चोका )

सु..मन(Suman Kapoor) said...

बढ़िया

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर ।

कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।

इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।

Login-Dashboard-settings-posts and comments-show word verification (NO)

अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-

http://www.youtube.com/watch?v=VPb9XTuompc

निभा चौधरी said...

शुक्रिया सर इतनी आसान भाषा में समझाने के लिए... मैंने सेटिंग चेंज कर दी है...!!

निभा चौधरी said...

आभार सर ....!!!

निभा चौधरी said...

शुक्रिया सर पसंद करने के लिए....!!!

निभा चौधरी said...

धन्यवाद सुमन जी...!!!

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