सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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हाइकू____|||

जीवन पथ

उचित अनुचित

मैं हूँ विक्षिप्त


रुग्ण हृदय

शोकाकुल है देह

स्मरण तुम


घना कोहरा

धुंधली सी ये आँखें

फ़ैली हैं यादें


उदास क्षण

मेरी ये तन्हाइयां

यादें जुगनू


प्यार है तेरा

मचलती लहरें

मैं हूँ मछली

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15 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अच्छा प्रयास किया है आपने।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-11-2015) को "मैला हुआ है आवरण" (चर्चा-अंक 2175) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Nibha choudhary said...

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शास्त्री जी___आपकी प्रतिक्रिया ही मुझे हौसला देती है :)

Nibha choudhary said...

पहली बार में ही मेरे लिखे हाइकू को चर्चा मंच में शामिल करने हेतु हृदय से आभार आपका :)

Jamshed Azmi said...

सुंदर हाइकू। पढ़कर अच्‍छा लगा।

Nibha choudhary said...

आभार आज़मी जी

Onkar said...

सुन्दर हाइकु

Nibha choudhary said...

शुक्रिया ओंकार जी

हिमकर श्याम said...

सुंदर हाइकु

हिमकर श्याम said...

सुंदर हाइकु

नीरज नीरज गुप्ता said...

अच्छा प्रयास

Nibha choudhary said...

शुक्रिया :)

Nibha choudhary said...

आभार आपका :)

sunita agarwal said...

Badhiya prayas
उदास क्षण और प्यार है तेरा विशेष रूप से अच्छे लगे शुभकामनाये 😊👍

sunita agarwal said...

Badhiya prayas
उदास क्षण और प्यार है तेरा विशेष रूप से अच्छे लगे शुभकामनाये 😊👍

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